खटीमा में 47 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी, वैदिक अनुष्ठान के साथ हुआ धर्म प्रवेश

खबरें शेयर करें

खटीमा में 47 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी, वैदिक रीति-रिवाज से हुआ धर्म प्रवेश

खटीमा: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा विकासखंड स्थित ग्राम नौगवांनाथ में आयोजित एक वैदिक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान 47 लोगों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन धर्म स्वीकार किया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सभी प्रतिभागियों ने तिलक लगाकर एवं गंगाजल का आचमन कर सनातन परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

बताया गया कि धर्म वापसी करने वाले सभी परिवार थारू जनजाति से संबंधित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन परिवारों ने लगभग दो वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपनाया था। ग्राम प्रधान माया चंद और समाजसेवी जगदीश चंद ने इन परिवारों से लंबे समय तक संवाद और काउंसलिंग की, जिसके बाद उन्होंने स्वेच्छा से पुनः हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया।

वैदिक विधि-विधान से कराया गया धर्म प्रवेश

कार्यक्रम के दौरान यज्ञ, हवन और पूजा-अर्चना के साथ वैदिक विधि-विधान के अनुसार धर्म प्रवेश की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस अवसर पर गुलाब सिंह राणा, दशरथ सिंह, किरन सिंह, कमल सिंह, रमेश सिंह, राजवती देवी, इंद्राणी सिंह और चंदर सिंह सहित उनके परिवारों ने सनातन धर्म में वापसी की।

एक सप्ताह में 150 से अधिक लोगों की वापसी का दावा

कार्यक्रम के आयोजकों का दावा है कि बीते एक सप्ताह के दौरान खटीमा विकासखंड के विभिन्न गांवों से 150 से अधिक लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सनातन धर्म स्वीकार किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

धर्म वापसी कार्यक्रम में ग्राम प्रधान माया चंद, समाजसेवी जगदीश चंद, भाजपा नेता रंदीप पोखरिया, विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के पूरन चंद्र जोशी, सी.के. बिष्ट सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

See also  उत्तराखंड में आज बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी,

खटीमा में पहले भी सामने आ चुके हैं धर्मांतरण के मामले

गौरतलब है कि खटीमा क्षेत्र में धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। इसी वर्ष 27 मई को पुलिस ने कथित अवैध धर्मांतरण के एक मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि आरोपी गरीब, थारू समाज और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पैसे, इलाज और बेहतर जीवन का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित या दबाव बना रहे थे। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।