उत्तराखंड में आसमानी आफत का साया: भारी बारिश का रेड अलर्ट, चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा रोकी गई, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर

उत्तराखंड में आसमानी आफत का साया: भारी बारिश का रेड अलर्ट, चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा रोकी गई, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज एक बार फिर बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की प्रबल चेतावनी जारी की गई है। बिगड़ते मौसम और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को भांपते हुए शासन-प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा, सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब की यात्रा और पर्वतीय ट्रेकिंग गतिविधियों पर आगामी आदेशों तक पूरी तरह से अस्थायी रोक लगा दी गई है।

कुमाऊं से गढ़वाल तक रेड अलर्ट का शिकंजा

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश भर में अलग-अलग दिनों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 सितंबर को कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए मूसलाधार से भीषण बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, 27 सितंबर को गढ़वाल मंडल के देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी जिलों में अत्यंत भारी बारिश की संभावना के चलते रेड अलर्ट घोषित किया गया है। अन्य पर्वतीय और मैदानी जिलों में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है।

भूस्खलन और जलभराव का बढ़ा खतरा, रास्ते रोकने की नौबत

लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश के चलते संवेदनशील पर्वतीय राजमार्गों पर चट्टानें खिसकने, बोल्डर गिरने और भारी भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का अंदेशा कई गुना बढ़ गया है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे के कई डेंजर जोन में मलबा आने से यातायात ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में नदियों और बरसाती नालों के उफान पर आने से जलभराव की गंभीर स्थिति बन सकती है। इन्हीं तमाम संभावित खतरों को देखते हुए राज्य सरकार ने किसी भी बड़े हादसे को टालने के लिए चारधाम यात्रा को फौरन रोकने का सख्त फैसला लिया है। जो श्रद्धालु जहां पहुंचे हैं, उन्हें वहीं सुरक्षित पड़ावों, होटलों और आश्रमों में रुकने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग की सख्त एडवाइजरी: ‘अनावश्यक यात्रा से बचें’

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम सामान्य होने, बारिश का दौर थमने और मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। सचिव ने देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से भावुक अपील की है कि जब तक मौसम का यह रौद्र रूप शांत नहीं हो जाता, तब तक वे किसी भी तरह की अनावश्यक यात्रा या पहाड़ों की ओर रुख करने से पूरी तरह परहेज करें।

जिले स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी मुस्तैद, SDRF और NDRF तैनात

शासन की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM), पुलिस कप्तानों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने के आदेश दिए गए हैं। संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें, पोकलेन और राहत दल पहले से तैनात कर दिए गए हैं ताकि मलबा आने पर मार्गों को तत्काल साफ किया जा सके। राज्य आपदा प्रतिरोधी बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर रखा गया है। इसके साथ ही नदियों और जलस्रोतों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और नदी किनारे रहने वाली बस्तियों में मुनादी करवाकर लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी जा रही है।