गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका मंदिर, पंडित नहीं फौजी करते है माँ की पूजा

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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि वीरता और देशभक्ति का प्रतीक भी है. मां काली को समर्पित यह शक्तिपीठ आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित माना जाता है और कुमाऊं रेजिमेंट की संरक्षक देवी के रूप में प्रसिद्ध है. मंदिर अपनी अद्भुत श्यामवर्णी मूर्ति, चमत्कारों और लोककथाओं के कारण श्रद्धालुओं और सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में स्थित प्रसिद्ध हाट कालिका मंदिर न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि भक्तों की आस्था, साहस और वीरता का प्रतीक भी है. मां काली को समर्पित यह शक्तिपीठ कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य देवी मानी जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, आदिगुरु शंकराचार्य ने मंदिर की स्थापना छठी शताब्दी में की थी. उस समय यह स्थान घने जंगलों और निर्जन पहाड़ियों से घिरा हुआ था,…
मंदिर का धार्मिक महत्व कुमाऊं क्षेत्र के लोगों और भारतीय सेना, विशेषकर कुमाऊं रेजिमेंट के लिए अत्यंत गहरा है. मंदिर में स्थापित मां काली की श्यामवर्णी प्रस्तर मूर्ति अद्भुत शक्ति की प्रतीक मानी जाती है. मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर और प्राचीन प्रतिमाएं, जैसे उमा-महेश की मूर्तियां हैं. कहा जाता है कि देवी रात में मंदिर में विश्राम करती हैं और सुबह उनके बिस्तर पर सिलवटें दिखाई देती हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रबल बनाती हैं,…
लोककथाओं के अनुसार, मां काली ने इसी स्थान पर महिषासुर और अन्य राक्षसों का वध किया था. तब से यह स्थान शक्ति की भूमि के नाम से प्रसिद्ध है. मंदिर की प्रसिद्धि केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वीरता से भी जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि एक बार कुमाऊं रेजिमेंट का जहाज भयंकर समुद्री तूफान में फंस गया था. जब सभी प्रयास विफल हो गए, सैनिकों ने हाट कालिका माता से प्रार्थना की. चमत्कारिक रूप से तूफान थम गया और जहाज सुरक्षित तट पर पहुंच गया,…
इसके बाद रेजिमेंट ने माता को अपनी संरक्षक देवी के रूप में स्वीकार किया और ‘कालिका माता की जय’ को अपना युद्ध घोष बना लिया. सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद सूबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में रेजिमेंट के जवानों ने देवी की कृपा मानते हुए हाट कालिका मंदिर में महाकाली की नई मूर्ति स्थापित की. तब से हर वर्ष रेजिमेंट के सैनिक अपनी मन्नत पूरी होने पर मंदिर में अपने नाम अंकित घंटियां चढ़ाते हैं, जो उनकी भक्ति और कृतज्ञता का प्रतीक हैं,…
देवदार के घने जंगलों के बीच बसा मां काली का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. यहां पहुंचकर भक्त मां कालिका के दर्शन के साथ-साथ अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं. वास्तव में हाट कालिका मंदिर न केवल कुमाऊं की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है, बल्कि देशभक्ति और आस्था का संगम भी है,…
108 महाकाली मंदिर समिति गंगोलीहाट के अध्यक्ष हरगोविंद रावल के अनुसार, यह मंदिर पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां माता कालिका की मूर्ति नहीं, बल्कि शक्ति की पूजा होती है. देश और विदेश (ब्रिटेन और अमेरिका) से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं. उन्होंने बताया कि जब आदिगुरु शंकराचार्य ने मंदिर की स्थापना की, तब मां काली उग्र रूप में थीं. अग्नि के उग्र रूप को शांत करने के बाद सात भतेलों के माध्यम से उस स्थान पर मूर्ति की स्थापना की गई,…
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