प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी दिवंगत मां को भी अपमानजनक शब्दों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि तमाम व्यक्तिगत हमलों के बावजूद उन्होंने संयम बनाए रखा और देशहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन राजनीतिक मतभेदों के नाम पर किसी के परिवार या दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से सार्वजनिक जीवन में शालीनता, गरिमा और स्वस्थ राजनीतिक संवाद बनाए रखने की अपील की।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और परिवार को विवादों में घसीटना लोकतंत्र को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि जनता मुद्दों पर राजनीति देखना चाहती है, न कि व्यक्तिगत कटाक्ष और अपमान।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह बयान राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन सकता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं और सभी की नजर विपक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।
