🚨 बड़ी खबर | आदि कैलाश यात्रा पर अस्थाई रोक
पिथौरागढ़ | उत्तराखंड

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के दूसरे चरण पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया गया है। यात्रा का दूसरा फेज 15 सितंबर से शुरू होना था, लेकिन खराब मौसम और यात्रा मार्ग में सड़क एवं पुलों की स्थिति को देखते हुए इसे फिलहाल 20 सितंबर तक टाल दिया गया है।
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि आदि कैलाश जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इनर लाइन परमिट 20 सितंबर से जारी किए जाने की संभावना है। हालांकि यह तारीख अभी अंतिम नहीं है। यात्रा शुरू करने का फैसला मौसम और सड़क की स्थिति सामान्य होने के बाद ही लिया जाएगा।
🌧️ खराब मौसम बना बड़ी वजह
दरअसल, धारचूला-गुंजी मार्ग पर कुलागढ़ के पास बेली ब्रिज महज दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार बह गया है। इसके चलते आदि कैलाश जाने वाले यात्रियों के सामने आवाजाही की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
ब्रिज बहने के बाद बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी BRO ने इसे दोबारा बनाने का काम शुरू कर दिया है। वहीं, सेना ने ऊंचाई वाले इलाकों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी तैयार किया है।
प्रशासन का साफ कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जब तक मौसम और परिवहन व्यवस्था यात्रा के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक दूसरे फेज की शुरुआत नहीं की जाएगी।
🛕 रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
आदि कैलाश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में इस साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।
1 मई से यात्रा शुरू होने के बाद महज दो महीने के भीतर 52,441 श्रद्धालु आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 अक्टूबर 2023 की आदि कैलाश यात्रा के बाद इस धार्मिक पर्यटन क्षेत्र की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
आदि कैलाश यात्रा का धार्मिक और सामरिक दोनों दृष्टि से विशेष महत्व है। भारत-तिब्बत सीमा के करीब स्थित यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, धार्मिक आस्था और हिमालयी वातावरण के लिए श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
⚠️ फिलहाल श्रद्धालु रखें इंतजार
प्रशासन ने संकेत दिया है कि 20 सितंबर से इनर लाइन परमिट जारी किए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उस समय के मौसम और सड़क की स्थिति को देखकर लिया जाएगा।
यानी फिलहाल आदि कैलाश जाने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं को 20 सितंबर तक इंतजार करना होगा।
मौसम साफ हुआ, रास्ते सुरक्षित हुए और प्रशासन ने हरी झंडी दी—तभी दोबारा गूंजेगा आदि कैलाश यात्रा का जयघोष।
