अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो अमेरिका के अनुसार अपने यहां ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में असफल रहे हैं।

यूएसटीआर के प्रमुख एंबेसडर जेमीसन ग्रीर ने कहा कि वैश्विक व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफलता अमेरिकी श्रमिकों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब इस स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।
यह प्रस्ताव 60 देशों पर की गई व्यापक जांच के बाद सामने आया है। जांच के आधार पर देशों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं, जिन पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। वहीं दूसरी श्रेणी में कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और इक्वाडोर जैसे देशों को रखा गया है, जिन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है।
भारत सरकार ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए इस जांच प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। भारत का कहना है कि व्यापार से जुड़े ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा प्रतिबंधों के बजाय द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने वस्त्र (टेक्सटाइल) क्षेत्र के लिए राहत का संकेत भी दिया है। प्रस्ताव के तहत कुछ देशों से आयात होने वाले कपड़ों और कच्चे माल की सीमित मात्रा को कम शुल्क दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों को आंशिक राहत मिलने की संभावना है।
यूएसटीआर ने प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। 22 जून 2026 तक जनसुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन किए जा सकेंगे, जबकि 6 जुलाई 2026 तक लिखित टिप्पणियां जमा करनी होंगी। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत सहित कई देशों के निर्यातकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है और वैश्विक व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
