उत्तराखंड में जमीन विवाद और नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन लगातार सख्त नजर आ रहा है। नैनीताल और चंपावत से सामने आए दो मामलों में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साफ संदेश दिया है कि नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम क्षेत्र में आवासीय पट्टे की जमीन पर रेस्टोरेंट चलाना लोगों को भारी पड़ गया। जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि जिस जमीन को रहने के उद्देश्य से आवंटित किया गया था, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके बाद डीएम ललित मोहन रयाल ने बड़ा फैसला लेते हुए संबंधित पट्टा निरस्त कर दिया और जमीन को राज्य सरकार के पक्ष में दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए।
प्रशासन के मुताबिक, छड़ा मझेड़ा निवासी नंदराम को यह भूमि आवासीय उपयोग के लिए मिली थी, लेकिन बाद में उनके वारिसों द्वारा वहां रेस्टोरेंट चलाया जाने लगा। जांच में करीब 0.008 हेक्टेयर भूमि पर नियमों के खिलाफ व्यवसाय संचालित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल सख्त कार्रवाई की।
वहीं दूसरी ओर चंपावत में पुश्तैनी जमीन का विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। लंबे समय से चल रहे विवाद के दौरान एक पक्ष ने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी, जिसमें दिनेश तड़ागी घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई।
मामले को गंभीर मानते हुए डीएम ललित मोहन रयाल ने आरोपी महेंद्र कुमार तड़ागी के दोनों शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए। प्रशासन ने यह कार्रवाई आयुध अधिनियम 1959 की धारा 17(3) के तहत की है।
इन दोनों मामलों के बाद साफ हो गया है कि उत्तराखंड में अब जमीन विवाद, अवैध व्यवसाय और हथियारों के गलत इस्तेमाल पर प्रशासन पूरी सख्ती के मूड में है। स्थानीय लोगों के बीच भी इन कार्रवाइयों की चर्चा तेज है, क्योंकि कैंची धाम जैसे संवेदनशील और चर्चित क्षेत्र में प्रशासन का यह कदम बड़ा संदेश माना जा रहा है।
