पहली बार 5वें दिन ही अंतर्ध्यान हुए बाबा बर्फानी, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को लगा झटका

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इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली। यात्रा शुरू होने के महज पांचवें दिन ही पवित्र बाबा बर्फानी (हिमलिंग) पूरी तरह अंतर्ध्यान (पिघल) हो गए। इसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र हिमलिंग के दर्शन से वंचित रह गए।

जानकारी के अनुसार, अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 7 जुलाई तक ही प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार हिमलिंग का इतने कम समय में समाप्त होना चिंता का विषय बन गया है। इससे पहले हिमलिंग यात्रा शुरू होने के लगभग 7 से 10 दिन बाद तक श्रद्धालुओं को दर्शन देता था, जबकि कई वर्ष पहले यह 20 से 25 दिनों तक भी सुरक्षित रहता था।

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है, लेकिन हिमलिंग के शीघ्र अंतर्ध्यान होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्राकृतिक स्वरूप में बाबा बर्फानी के दर्शन नहीं कर पाए।

मई में था लगभग 7 फीट ऊंचा हिमलिंग

अधिकारियों द्वारा जारी तस्वीरों के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह में हिमलिंग लगभग 7 फीट ऊंचा दिखाई दे रहा था। जून के अंत तक इसका आकार लगातार घटता गया और यात्रा शुरू होने के समय यह काफी छोटा रह गया। यात्रा के पांचवें दिन तक यह पूरी तरह पिघल गया।

बढ़ते तापमान और मानव गतिविधियां बनीं चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और गुफा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही मानव गतिविधियों का असर हिमलिंग पर पड़ रहा है। यात्रा मार्ग पर बढ़ती आवाजाही, वाहनों की संख्या, लंगर, अस्थायी ढांचे और अन्य व्यवस्थाओं से स्थानीय तापमान प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई जा रही है।

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यात्रा व्यवस्था में बदलाव पर विचार

सूत्रों के अनुसार, भविष्य में हिमलिंग के अधिक समय तक सुरक्षित रहने और श्रद्धालुओं को प्राकृतिक स्वरूप में दर्शन कराने के उद्देश्य से यात्रा की तिथियों में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले वर्षों में यात्रा पहले शुरू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

बाबा बर्फानी के समय से पहले अंतर्ध्यान होने की घटना ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भविष्य में इस पवित्र धरोहर को संरक्षित रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।