उत्तराखंड बीजेपी में अंदरूनी सियासत एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगामी उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले प्रदेश में नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। खासतौर पर गदरपुर स्थित विधायक अरविंद पांडे के आवास पर लगातार हो रही वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और सांसद अनिल बलूनी के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अरविंद पांडे से मुलाकात करने पहुंचे। इन बैठकों की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले संगठन के भीतर माहौल को संतुलित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
दरअसल, पिछले कुछ समय से विधायक अरविंद पांडे अपनी बयानबाजी को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। उनके कई बयान सरकार और संगठन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्रों की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी नेतृत्व अब किसी भी तरह के विवाद को बढ़ने देने के मूड में नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए संगठन एकजुटता का संदेश देना चाहता है। यही वजह है कि बड़े नेताओं की सक्रियता अचानक बढ़ी हुई दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आवास पर जल्द ही बीजेपी की एक अहम बैठक भी होने वाली है, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और संगठन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने और राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले संगठन को एकजुट दिखाने पर फोकस रह सकता है।
हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लगातार पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी से इनकार कर रहे हैं। बावजूद इसके, लगातार हो रही राजनीतिक मुलाकातों ने उत्तराखंड बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
अब सभी की नजर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे और उससे पहले होने वाली बैठकों पर टिकी हुई है। देखने वाली बात होगी कि पार्टी नेतृत्व इन गतिविधियों को सामान्य राजनीतिक मुलाकात बताकर आगे बढ़ता है या फिर संगठन में लंबे समय से चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए कोई बड़ा संदेश सामने आता है।
