पिथौरागढ़ जिले में भारत-चीन सीमा पर मौजूद भगवान शिव और माता पार्वती की तपस्थली आदि कैलाश एवं ओम पर्वत की यात्रा शुरू होने जा रही है. आगामी एक मई से पवित्र एवं आध्यात्मिक इस यात्रा का आगाज हो जाएगा. इस बार यह यात्रा खास होने वाली है. क्योंकि, आस्था और व्यापार दोनों की शुरुआत होगी. वहीं, इनर लाइन परमिट भी बनने शुरू हो गए हैं,….

दरअसल, पिथौरागढ़ जिले से दो ऐतिहासिक काम शुरू होने वाले हैं. जिनका देश और पिथौरागढ़ के लोगों को इंतजार रहता है. 1 मई से आदि कैलाश और ओम (ॐ) पर्वत यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है, तो वहीं लंबे समय से ठप पड़ा भारत-चीन सीमांत व्यापार भी फिर से शुरू होने की प्रक्रिया में है,…
भारत और चीन के बीच शुरू होगा व्यापार: आगामी 1 जून भारत और चीन के बीच व्यापार भी शुरू हो रहा है. यह व्यापार कोरोनाकाल में बंद हो गया था. जिसके बाद अब फिर से इसे शुरू किया जा रहा है. इसके लिए ट्रेड पास यानी व्यापार पास बनाने की प्रक्रिया पर काम जारी है,….
इससे न केवल सीमांत क्षेत्र लोगों का आना-जाना शुरू होगा. बल्कि, व्यापार आदि से स्थानीय लोगों को फायदा भी मिलेगा. लिहाजा, जिला प्रशासन इसकी तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है. हर स्तर पर व्यवस्थाओं को मुकम्मल किया जा रहा है. ताकि, आने वाले समय में यह क्षेत्र न केवल धार्मिक बल्कि, आर्थिक दृष्टि से भी सशक्त बन सके,….
भगवान शिव-पार्वती से जुड़ा है आदि कैलाश का महत्व: आदि कैलाश को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है. जिसे छोटा कैलाश या कैलास भी कहा जाता है. जो पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी में स्थित एक पवित्र एवं आध्यात्मिक स्थान है. जिसका महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक तीनों रूपों में काफी गहरा है,…..
आदि कैलाश का धार्मिक महत्व जानिए: आदि कैलाश को भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती का तपोस्थली भी माना जाता है. माना जाता है कि यहां भगवान भोलेनाथ ने तप किया था. इसलिए आदि कैलाश को ‘दूसरा कैलाश’ भी कहा जाता है. आदि कैलाश के दर्शन मार्ग पर पार्वती कुंड भी है. जिसका संबंध माता पार्वती से माना जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने इस स्थान पर स्नान कर ध्यान लगाया था,…..
