उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों पर धामी सरकार सख्त, 6 अगस्त के बाद हो सकता है बड़ा एक्शन

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उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर धामी सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि जो वक्फ संपत्तियां तय समय तक केंद्र सरकार के ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें संदिग्ध या अवैध कब्जे की श्रेणी में मानते हुए सरकार अपने अधीन लेने की कार्रवाई कर सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सात हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन इनमें से करीब साढ़े चार हजार संपत्तियों का रिकॉर्ड अब तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है। इसी को लेकर शासन की चिंता बढ़ गई है।

सरकार को आशंका है कि कुछ जमीनों पर सरकारी भूमि पर कब्जा कर बाद में उन्हें वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराया गया हो। यही वजह है कि अब राजस्व रिकॉर्ड, खसरा-खतौनी, सीमांकन और स्वामित्व दस्तावेजों की गहन जांच की तैयारी की जा रही है।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने साफ कहा है कि जिन संपत्तियों पर अवैध कब्जे पाए जाएंगे, उन्हें कब्जा मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि “धामी सरकार का बुलडोजर अब वक्फ माफियाओं पर चलेगा।”

वहीं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने भी संकेत दिए हैं कि छह अगस्त के बाद सरकार बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि कई बड़ी संपत्तियां अब तक पोर्टल पर दर्ज नहीं हुई हैं और सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है।

जिलावार आंकड़ों में हरिद्वार सबसे ज्यादा संवेदनशील जिला माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में संपत्तियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। देहरादून और अन्य जिलों में भी कई संपत्तियां जांच के दायरे में हैं।

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सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सरकारी जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं।