लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाके में भारतीय सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा लेह के पास तांगस्टे क्षेत्र में हुआ, जहां सेना का सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर अचानक क्रैश हो गया। राहत की बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में सवार तीनों सैन्य अधिकारी सुरक्षित बच गए और उन्हें केवल मामूली चोटें आई हैं।

जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर उड़ा रहे थे, जबकि 3 इन्फेंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी उसमें मौजूद थे। हादसा बेहद कठिन और ऊंचाई वाले इलाके में हुआ, जिसके बावजूद सभी अधिकारियों का सुरक्षित बच निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हादसे की वजह हो सकती हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
इस घटना के बाद सेना में इस्तेमाल हो रहे पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। खासकर लद्दाख और सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में इन हेलीकॉप्टरों का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना आने वाले वर्षों में पुराने हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर शामिल करने की तैयारी कर रही है। सेना को ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 250 नए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया अगले 8 से 10 वर्षों तक जारी रह सकती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के तहत स्वदेशी हेलीकॉप्टरों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
